जानिए भारत के अंतर्राष्ट्रीय जज दलवीर भंडारी के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय फिर से चुने जाने के बारे में।

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जानिए भारत के अंतर्राष्ट्रीय जज दलवीर भंडारी के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय फिर से चुने जाने के बारे में।
Dalvir Bhandari

फिर से जानिए भारत के अंतर्राष्ट्रीय जज दलवीर भंडारी के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय फिर से चुने जाने क बारे में।

दलवीर भंडारी को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) में दूसरे कार्यकाल के लिए जज निर्वाचित होने से विश्व में भारत की नई पहचान धाक एक बार फिर बढ़ गई है। चौथे भारतीय है जो आइसीजे में नियुक्त होने वाले हैं। 2012 में पहली बार भंडारी
आइसीजे के जज नियुक्त हुए थे। इससे भारत की नियुक्ति की कूटनीति को बल मिलने की संभावना है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) क्या है ?

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना जून 1945 में संयुक्त राष्ट्र के अधिकार पत्र के अनुसार हुई। अप्रैल 1945 आइसीजे ने से कार्य शुरू किया। नीदरलैंड के हेग में इसका मुख्यालय है और 193 देश इसके सदस्य हैं। अंग्रेजी और फ्रांसीसी आधिकारिक भाषाएं हैं। मौजूदा अध्यक्ष रॉनी अब्राहम हैं।

आइसीजे देशों के बीच कानूनी विवादों अंतरराष्ट्रीय मामलो पर सुनवाई करता है। देश इसके लिए आइसीजे में अपील करते है। उनके लिए इसका निर्णय मानना अनिवार्य होता है। कोई भी सदस्य देश अपने किसी खास मामले की सुनवाई के लिए इसमें विशेष जज भी नियुक्त कर सकता है। फिर से जानिए भारत के अंतर्राष्ट्रीय जज दलवीर भंडारी के

जानिए भारत के अंतर्राष्ट्रीय जज दलवीर भंडारी के अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय फिर से चुने जाने के बारे में।
International Court

फिर से चुने जाने क बारे में।

इसमें 15 जजों की पीठ होती है। तीन साल क लिए 5 जजों की नियुक्ति होती है ।

दलवीर भंडारी का सफर !

सफर : 1946 भंडारी का जन्म एक अक्टूबर, को राजस्थान के जोधपुर में हुआ।

-1966 में जोधपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक, 1968 में कानून की पढ़ाई की।

-1968-70 और 1973-77 तक राजस्थान हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की।

-1971 में शिकागो की नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से मास्टर्स ऑफ लॉ किया।

-2014 में पद्म भूषण से सम्मानित।

-1991-2004 तक दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहे।

-2004-05 तक बांबे हाईकोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रहे।

-2005-12 तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे।

आइसीजे जा चुके भारतीय
बेनेगल नरसिंह राऊ (1952-53) नागेंद्र सिंह (1973-88), रघुनंदन स्वरूप पाठक (1989-91),
(1985-88 तक अध्यक्ष और 1976-79 तक उपाध्यक्ष भी रहे)

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